ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 103103.6श्रीरामचरितमानस 103.6सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार। गुनउँ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार ॥102(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय