ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 103103.4श्रीरामचरितमानस 103.4इरिषा परुषाच्छर लोलुपता। भरि पूरि रही समता बिगता।। सब लोग बियोग बिसोक हुए। बरनाश्रम धर्म अचार गए ॥4॥पिछलाअगलापूरा अध्याय