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श्रीरामचरितमानस 61.2

तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।
अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत ॥60(क)॥

पूरा अध्याय