ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 6161.3श्रीरामचरितमानस 61.3भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार। मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार ॥60(ख)॥पिछलापूरा अध्याय