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श्रीरामचरितमानस 162.3

तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि ॥161(ख)॥

पूरा अध्याय