ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 162162.2श्रीरामचरितमानस 162.2अब लगि मोहि न मिलेउ कोउ मैं न जनावउँ काहु। लोकमान्यता अनल सम कर तप कानन दाहु ॥161(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय