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महाभारत 128.34

उमोवाच
भगवन्संशयो मेऽत्र तं मे व्याख्यातुमर्हसि
चातुर्वर्ण्यस्य धर्मं हि नैपुण्येन प्रकीर्तय

पूरा अध्याय