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महाभारत 184.16

कच्चित्सवर्णप्रवरो मनुष्य; उद्रिक्तवर्णोऽप्युत वेह कच्चित्
कच्चिन्न वामो मम मूर्ध्नि पादः; कृष्णाभिमर्शेन कृतोऽद्य पुत्र

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