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महाभारत 184.17

कच्चिच्च यक्ष्ये परमप्रतीतः; संयुज्य पार्थेन नरर्षभेण
ब्रवीहि तत्त्वेन महानुभावः; कोऽसौ विजेता दुहितुर्ममाद्य

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