सूक्त 16
16.1
सुरक्षा १-५ ब्रह्मा। प्राणः, अपानः, आयुः। (एकावसानम्) १, ३ एकपदासुरी त्रिष्टुप्,
प्राणा॑पानौ मृ॒त्योर्मा॑ पातं॒ स्वाहा॑ ॥१॥
16.2
द्यावा॑पृथिवी॒ उप॑श्रुत्या मा पातं॒ स्वाहा॑ ॥२॥
16.3
सूर्य॒ चक्षु॑षा मा पाहि॒ स्वाहा॑ ॥३॥
16.4
अग्ने॑ वैश्वानर॒ विश्वै॑र्मा दे॒वैः पा॑हि॒ स्वाहा॑ ॥४॥
16.5
विश्वं॑भर॒ विश्वे॑न मा॒ भर॑सा पाहि॒ स्वाहा॑ ॥५॥