प्रह्लाद और खंभा
प्रह्लाद एक छोटा सा बालक था, जो अपने पूरे मन से भगवान विष्णु से प्रेम करता था।
उसके पिता, राजा हिरण्यकशिपु, बहुत अभिमानी थे। वे चाहते थे कि सब लोग केवल उन्हीं की पूजा करें। लेकिन प्रह्लाद लगातार विष्णु का नाम जपता रहा।
क्रोधित राजा ने गरजकर कहा, "कहाँ है तेरा विष्णु? क्या वह इस खंभे में है?"
"वे सब जगह हैं," प्रह्लाद ने शांति से कहा।
राजा ने खंभे पर प्रहार किया। वह फट गया, और उसमें से नरसिंह प्रकट हुए, जो आधे मनुष्य और आधे सिंह थे, और उन्होंने प्रह्लाद की रक्षा की।
**हम क्या सीखते हैं:** श्रद्धा हमें साहसी बनाती है, भले ही हम छोटे हों।
