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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 8.63

आ प॑वस्व॒ हिर॑ण्यव॒दश्व॑वत्सोम वी॒रव॑त् । वाजं॒ गोम॑न्त॒मा भ॑र॒ स्वाहा॑ ॥६३॥

पूरा अध्याय