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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 8.62

य॒ज्ञस्य॒ दोहो॒ वित॑तः पुरु॒त्रा सो अ॑ष्ट॒धा दिव॑म॒न्वात॑तान ।
स य॑ज्ञ धुक्ष्व॒ महि॑ मे प्र॒जा या॑ᳪ रा॒यस्पोषं॒ विश्व॒मायु॑रशीय॒ स्वाहा॑ ॥६२॥

पूरा अध्याय