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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 6.23

ह॒विष्म॑तीरि॒मा आपो॑ ह॒विष्माँ॒२ आ वि॑वासति । ह॒विष्मा॑न् दे॒वो अ॑ध्व॒रो ह॒विष्माँ॑२ अस्तु॒ सूर्य॑ः ॥२३॥

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