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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 36.21

नम॑स्ते अस्तु वि॒द्युते॒ नम॑स्ते स्तनयि॒त्नवे॑ । नम॑स्ते भगवन्नस्तु॒ यत॒ः स्व॒ः स॒मीह॑से ॥२१॥

पूरा अध्याय