Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 35.5

स॒वि॒ता ते॒ शरी॑राणि मा॒तुरु॒पस्थ॒ आ व॑पतु । तस्मै॑ पृथिवि॒ शं भ॑व ॥५॥

पूरा अध्याय