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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 3.56

व॒यᳪ सो॑म व्र॒ते तव॒ मन॑स्त॒नूषु॒ बिभ्र॑तः । प्र॒जाव॑न्तः सचेमहि ॥५६॥

पूरा अध्याय