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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 3.48

अव॑भृथ निचुम्पुण निचे॒रुर॑सि निचुम्पु॒णः ।
अव॑ दे॒वैर्दे॒वकृ॑त॒मेनो॑ऽयासिष॒मव॒ मर्त्यै॒र्मर्त्य॑कृतं पुरु॒राव्णो॑ देव रि॒षस्पा॑हि ॥४८॥

पूरा अध्याय