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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 20.64

अ॒श्विना॑ भेष॒जं मधु॑ भेष॒जं न॒ः सर॑स्वती । इन्द्रे॒ त्वष्टा॒ यश॒ः श्रिय॑ᳪ रू॒पᳪ-रू॑पमधुः सु॒ते ॥६४॥

पूरा अध्याय