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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 2.2

अदि॑त्यै॒ व्युन्द॑नमसि॒ विष्णो॑ स्तु॒पोऽस्यूर्ण॑म्म्रदसं त्वा स्तृणामि स्वास॒स्थां दे॒वेभ्यो॒ भुव॑पतये॒ स्वाहा॒
भुव॑नपतये॒ स्वाहा॑ भू॒तानां॒ पत॑ये॒ स्वाहा॑ ॥२॥

पूरा अध्याय