Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 18.26

त्र्यवि॑श्च मे त्र्य॒वी च॑ मे दित्य॒वाट् च॑ मे दित्यौ॒ही च॑ मे पञ्चा॒विश्च॑ मे पञ्चा॒वी च॑ मे त्रिव॒त्सश्च॑ मे त्रिव॒त्सा च॑ मे तुर्य॒वाट् च॑ मे तुर्यौ॒ही च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम् ॥२६॥

पूरा अध्याय