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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 17.61

इन्द्रं॒ विश्वा॑ अवीवृधन्त्समु॒द्रव्य॑चसं॒ गिर॑ः ।
र॒थीत॑मᳪ र॒थीनां॒ वाजा॑ना॒ᳪ सत्प॑तिं॒ पति॑म् ॥६१॥

पूरा अध्याय