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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 5.32

र॒क्षो॒हणौ॑ वलग॒हना॒ उप॑दधामि वैष्ण॒वी र॑क्षो॒हणौ॑ वलग॒हनौ॒ पर्यू॑हामि वैष्ण॒वी ।
वै॒ष्ण॒वम॑सि वैष्ण॒वा स्थ॑ ॥५॥

पूरा अध्याय