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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 5.13

(२) १२
त॒प्ताय॑नी मेऽसि वि॒त्ताय॑नी मेऽसि । अव॑तान्मा व्यथि॒तमव॑तान्मा नाथि॒तात् ॥१॥

पूरा अध्याय