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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 32.41

श्राय॑न्त इव॒ सूर्यं॒ विश्वेदिन्द्र॑स्य भक्षत ।
वसू॑नि जा॒ते जन॑मान॒ ओज॑सा॒ प्रति॑ भा॒गं न दी॑धिम ॥१२॥

पूरा अध्याय