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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 32.40

बट् सू॑र्य॒ श्रव॑सा म॒हाँ२ अ॑सि स॒त्रा दे॑व म॒हाँ२ अ॑सि ।
म॒ह्ना दे॒वाना॑मसु॒र्यः॑ पु॒रोहि॑तो वि॒भु ज्योति॒रदा॑भ्यम् ॥११॥

पूरा अध्याय