Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 3.64

व॒यँ सो॑म व्र॒ते तव॒ मन॑स्त॒नूषु॒ बिभ्र॑तः । प्र॒जाव॑न्तः सचेमहि ॥६॥

पूरा अध्याय