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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.67

न यत्परो॒ नान्त॑र आद॒धर्ष॑द्वृषण्वसू । दुः॒शᳪसो॒ मर्त्यो॑ रि॒पुः ॥३॥

पूरा अध्याय