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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.32

व्यन्तु॒ वयो॑रि॒प्तो रिहा॑णा म॒रुतां॒ पृष॑तीं गछ। व॒शा पृश्नि॑र्भू॒त्वा दिवं॑ गछ॒ ततो॑ नो॒ वृष्टि॒माव॑ह ॥३॥

पूरा अध्याय