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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 18.44

अव॑सृष्टा॒ परा॑ पत॒ शर॑व्ये॒ ब्रह्म॑सᳪशिते । गच्छा॒मित्रा॒न्प्रप॑द्यस्व॒ मामीषां॒ कञ्च॒नोच्छि॑षः ॥१३॥

पूरा अध्याय