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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 17.14

नम॑स्त॒ आयु॑धा॒याना॑तताय धृ॒ष्णवे॑ । उ॒भाभ्या॑मु॒त ते॒ नमो॑ बा॒हुभ्यां॒ तव॒ धन्व॑ने ॥१४॥

पूरा अध्याय