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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 16.66

अग्ने॒ तम॒द्याश्वं॒ न स्तोमैः॒ क्रतुं॒ न भ॒द्रᳪ हृ॑दि॒स्पृश॑म् । ऋ॒ध्यामा॑ त॒ ओहैः॑ ॥२६॥

पूरा अध्याय