Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 16.65

उ॒भे सु॑श्चन्द्र स॒र्पिषो॒ दर्वी॑ श्रीणीष आ॒सनि॑ ।
उ॒तो न॒ उत्पु॑पूर्या उ॒क्थेषु॑ शवसस्पत॒ इष॑ᳪ स्तो॒तृभ्य॒ आभ॑र ॥२५॥

पूरा अध्याय