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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.115

तुभ्यं॒ ता अ॑ङ्गिरस्तम॒ विश्वाः॑ सुक्षि॒तयः॒ पृथ॑क् । अग्ने॒ कामा॑य येमिरे ॥१५॥

पूरा अध्याय