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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.113

आप्या॑यस्व मदिन्तम॒ सोम॒ विश्वे॑भिर॒ᳪशुभिः॑ । भवा॑ नः स॒प्रथ॑स्तमः॒ सखा॑ वृ॒धे ॥१३॥

पूरा अध्याय