Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 12.84

अन्न॑प॒तेऽन्न॑स्य नो देह्यनमी॒वस्य॑ शु॒ष्मिणः॑ ।
प्र प्र॑ दा॒तारं॑ तारिष॒ ऊर्जं॑ नो धेहि द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे । वि॒श्वक॑र्मणे॒ स्वाहा॑ ॥१८॥

पूरा अध्याय