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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 12.83

उदे॑षां बा॒हू अ॑तिर॒मुद्वर्चो॒ अथो॒ बल॑म् । क्षि॒णोमि॒ ब्रह्म॑णा॒मित्रा॒नुन्न॑यामि॒ स्वाँ३ अ॒हम् ॥१७॥

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