शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 10.25
आ मा॒ वाज॑स्य प्रस॒वो ज॑गम्या॒देमे द्यावा॑पृथि॒वी वि॒श्वरू॑पे ।
आ मा॑ गंतं पितरा मातरा यु॒वमा मा॒ सोमो॑ अमृत॒त्वाय॑ गम्यात् ॥१२॥
आ मा॒ वाज॑स्य प्रस॒वो ज॑गम्या॒देमे द्यावा॑पृथि॒वी वि॒श्वरू॑पे ।
आ मा॑ गंतं पितरा मातरा यु॒वमा मा॒ सोमो॑ अमृत॒त्वाय॑ गम्यात् ॥१२॥