Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 82.5

प्रभाते काल्यमुत्थाय कृत्वा ऽ ऽह्निकमरिन्दमः ।
ऋषिं समुपचक्राम गमनाय रघूत्तमः ।। ७.८२.५ ॥

पूरा अध्याय