ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 6565.27वाल्मीकि रामायण 65.27ज्ञात्वा तदामिषं विप्रो मानुषं भाजनं गतम् । क्रोधेन महता ऽ ऽविष्टो व्याहर्तुमुपचक्रमे ।। ७.६५.२७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय