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वाल्मीकि रामायण 55.14

तदन्तरमथापश्यद्गौतमेनाभिपूरितम् ।
कोपेन महताविष्टो वसिष्ठो ब्रह्मणः सुतः ।। ७.५५.१४ ॥

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