ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 55.41वाल्मीकि रामायण 5.41संह्रादिः प्रघसश्चैव भासकर्णश्च राक्षसः । राका पुष्पोत्कटा चैव कैकसी च शुचिस्मिता ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय