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वाल्मीकि रामायण 35.45

तथास्य धावतो रूपमैरावतजिघृक्षया ।
मुहूर्तमभवद्घोरमिन्द्राग्न्योरिव भास्वरम् ।। ७.३५.४५ ॥

पूरा अध्याय