ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3535.42वाल्मीकि रामायण 35.42इन्द्रमाशंसमानस्तु त्रातारं सिंहिकासुतः । इन्द्र इन्द्रेति संत्रासान्मुहुर्महुरभाषत ।। ७.३५.४२ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय