ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3535.32वाल्मीकि रामायण 35.32अनेन स परामृष्टो राम सूर्यरथोपरि । अपक्रान्तस्ततस्त्रस्तो राहुश्चन्द्रार्कमर्दनः ।। ७.३५.३२ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय