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वाल्मीकि रामायण 31.15

सहस्रशिखरोपेतं सिंहाध्युषितकन्दरम् ।
प्रपातपतितैस्तोयैः साट्टहासमिवाम्बुधिम् ।। ७.३१.१५ ॥

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