ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3131.14वाल्मीकि रामायण 31.14स तमभ्रमिवाविष्टमुद्भ्रन्तमिव मेदिनीम् । अपश्यद्रावणो विन्ध्यमालिखन्तमिवाम्बरम् ।। ७.३१.१४ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय