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वाल्मीकि रामायण 26.43

सा विमुक्ता ततो रम्भा भ्रष्टमाल्यविभूषणा ।
गजेन्द्राक्रीडमथिता नदीवाकुलतां गता ।। ७.२६.४३ ॥

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