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वाल्मीकि रामायण 109.4

ततः सूक्ष्माम्बरधरो ब्रह्ममावर्तयन्परम् ।
कुशान्गृहीत्वा पाणिभ्यां प्रसज्य प्रययावथ ।। ७.१०९.४ ॥

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