ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 108108.6वाल्मीकि रामायण 108.6एवं सर्वं निवेद्याशु शत्रुघ्नाय महात्मने । विरेमुस्ते ततो दूतास्त्वर राजेति चाब्रुवन् ।। ७.१०८.६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय